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शादी के सात वचनों का बड़ा है महत्व, शास्त्रों में मिलता है ऐसा वर्णन

Posted On: 4 Feb, 2018 Others में

Shilpi Singh

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हिंदू धर्म में विवाह के सात फेरों का बहुत महत्व है। फेरों के दौरान सात वचनों को बोला जाता है, जिसका पालन सभी जोड़े को करना होता है। यह वचन अग्नि और ध्रुव तारा को साक्षी मानकर लिये जाते हैं। लेकिन इन वचनों का अर्थ क्या है? संस्कृत में बोले जाने वाले ये वचन शादी कर रहे जोड़ों को भी ठीक से समझ नहीं आते। इसीलिए यहां आपको इन सात वचनों का अर्थ बता रहे हैं जिसका महत्व शास्त्रों में भी समझाया गया है।


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1. पहला वचन

इस वचन में कन्या वर से कहती है कि वो कभी भी तीर्थ यात्रा पर जाएं तो मुझे साथ लेकर जाएं। आप कोई भी व्रत और धर्म कार्य करें तो आज ही की तरह अपने साथ मुझे स्थान दें। यदि आप इसे मानते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।


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2. दूसरा वचन

दूसरे वचन में कन्या वर से कहती है कि वो जिस तरह अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं ठीक उसी तरह मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें। ताकि हमारी गृहस्थी में किसी भी प्रकार का आपसी विवाद ना आ सके। अगर आप मुझे ये वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।


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3. तीसरा वचन

तीसरे वचन में कन्या वर से कहती है कि आप मुझे वचन दें कि जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा साथ देंगे।अगर आप मुझे साथ देने का वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।


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4. चौथा वचन

चौथे वचन में कन्या वर से कहती है कि अभी तक आप घर-परिवार की चिंता से पूरी तरह से मुक्त थे। लेकिन अब विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की सभी समस्याओं का दायित्व आपके कंधों पर आएगा। अगर आप इस भार को मेरे साथ उठाने का वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।

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5. पांचवा वचन

इस वचन में कन्या वर से कहती है कि शादी के बाद अपने घर के कार्यों, लेन-देन और अन्य खर्च करते समय अगर आप मेरी भी सलाह लेंगे तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।


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6. छठा वचन

इस वचन में कन्या वर के कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों या अन्य स्त्रियों के बीच बैठूं तो आप वहां किसी भी कारणवश मेरा अपमान नहीं करेंगे। इसके साथ ही यदि आप जुआ या किसी भी बुरे काम से खुद को दूर रखते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।

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7. सातवां वचन

इस आखिरी वचन में कन्या वर से कहती है कि वह पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगे और पति-पत्नी के आपसी प्रेम के बीच किसी को भागीदार ना बनाने का वचन देते हैं तो मैं आपके साथ जीवन बिताना स्वीकार करती हूं।…Next



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