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सदियों पुरानी है प्रयाग में कल्‍पवास की परंपरा, माघ मेले में इतनी बार स्‍नान होता है बहुत फलदायी!

Posted On: 6 Jan, 2018 Others में

Avanish Kumar Upadhyay

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इलाहाबाद में संगम के किनारे 2 जनवरी से माघ मेला शुरू हो चुका है। यह मेला 31 जनवरी तक चलेगा। इलाहाबाद में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। माघ को मोक्ष प्रदान करने वाला माह माना जाता है। पुराणों के अनुसार माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र धार्मिक स्थलों पर स्नान, दान और भगवान के नाम का जाप बहुत फलदायी माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार माघ माह में स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं। उन्हें भगवान विष्‍णु सुख-सौभाग्य, धन-धान्य और मोक्ष प्रदान करते हैं। माघ माह का स्नान पौष की पूर्णिमा से लेकर माघ की पूर्णिमा तक चलता है।


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प्रतीकात्‍मक फोटो


इलाहाबाद में हर साल लगता है माघ मेला


Magh mela


प्रयाग यानी इलाहाबाद में हर साल लगने वाले इस माघ मेले को कल्पवास भी कहा जाता है। देश के लगभग हर कोने से भक्तगण इसमें शामिल होने के लिए आते हैं। इलाहाबाद में कल्पवास की परंपरा कई सदियों से चल रही है। यह विश्व का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी माह में यहां पवित्र ‘संगम’ के किनारे विश्व प्रसिद्ध माघ मेला आयोजित होता है। बड़ी संख्‍या में लोग यहां आते हैं।


वेदों, पुराणों में मिलते हैं प्रयाग के साक्ष्‍य


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हिंदू पुराणों में सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान ब्रह्म देव ने इसे तीर्थ राजा यानि तीर्थस्थलों का राजा कहा है। इस स्थान पर ब्रह्मदेव ने गंगा, यमुना और पौराणिक नदी सरस्वती के संगम पर प्राकृष्ठ यज्ञ किया था। हमारे पवित्र धर्मग्रंथों वेदों, रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों तथा पुराणों में भी इस स्थान को ‘प्रयाग’ कहे जाने के साक्ष्य मिलते हैं।


माघ मेले में स्‍नान के हैं विशेष नियम


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माघ मेले में स्नान के लिए कुछ विशेष नियम बताए जाते हैं। माना जाता है कि माघ में मलमास पड़ जाए तो मासोपवास चंद्रायण आदि व्रत मलमास में ही समाप्त करना चाहिए और स्नान-दान आदि द्विमास के पूरा होने तक चलता रहता है। ऐसे ही नियम कुंभ के स्नान के समय भी होते हैं। पौष शुक्ल एकादशी से, पूर्णमासी से या अमावस्या से माघ स्नान प्रारंभ किया जाता है। माना जाता है कि प्रयाग में माघ मास में 3 बार स्नान करने से जो फल मिलता है, वो पृथ्वी पर 10 हजार अश्वमेघ यज्ञ करने से भी प्राप्त नहीं होता…Next


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