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चाणक्य नीति : हर व्यक्ति के होते हैं 5 पिता-माता, नहीं करना चाहिए किसी एक का भी अपमान

Posted On: 17 Feb, 2017 Religious में

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कहा जाता है धरती पर भगवान हर जगह नहीं होते इसलिए उन्होंने माता-पिता को बनाया है. दुनिया में चाहे कोई आपसे कितना भी प्यार करे लेकिन माता-पिता की जगह नहीं ले सकता.

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आचार्य चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में उसकी 5 माताएं और 5 पिता होते हैं यानि जन्म देने वाले माता-पिता के अलावा जीवन में ऐसे 10 लोग होते हैं जो माता-पिता के समान होते हैं. आइए, जानते है आचार्य चाणक्य ने ;चाणक्य नीति; में क्या कहा है.

हर व्यक्ति के पांच पिता


1. जन्मदाता

चाणक्य कहते हैं उस देवता तुल्य पिता का कभी अपमान नहीं करना चाहिए, जिसके आप अंश है. जन्म देने वाला पिता सबसे बड़ा होता है.


2. संस्कार देने वाला व्यक्ति

पहले समय में घर के बुर्जुग जैसे दादी, नानी, आदि बच्चों को संस्कार और संस्कृति का ज्ञान देते थे. आधुनिक काल में ये चलन खत्म होता जा रहा है. चाणक्य अनुसार जिस व्यक्ति ने आपको संस्कार दिए हैं, वो आपके पिता तुल्य है.

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3. विद्यादान देने वाला व्यक्ति

चाणक्य के अनुसार विद्या उतनी ही जरूरी है जितना भोजन इसलिए उनके अनुसार जो व्यक्ति आपको शिक्षित करता है, वो आपके पिता समान है.

4. भोजन देने वाला व्यक्ति

भूखे पेट संसार का हर ज्ञान व्यर्थ है इसलिए चाणक्य कहते हैं  कि जिस व्यक्ति की वजह से आपको रोटी मिलती है, वो व्यक्ति आपके पिता समान है.


5. बुरे समय में साथ देने वाला व्यक्ति

कहते हैं दुनिया में साथ देने वाले लोग बहुत कम होते हैं, अगर मुश्किलों के वक्त किसी ने आपका साथ दिया है तो वो व्यक्ति आपके पिता तुल्य है.

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ये 5 होते हैं माता तुल्य


1. स्वंय की माता

जिस माता ने आपको 9 महीने पेट में रखा है, उसका कर्ज आप कभी नहीं चुका सकते इसलिए कभी भी उस माता का स्थान कोई नहीं ले सकता.


2. गुरू की पत्नी

गुरू की पत्नी को हमेशा माता तुल्य मानना चाहिए क्योंकि गुरू पिता तुल्य होता है. गुरू की पत्नी पर कभी भी कुदृष्टि नहीं रखनी चाहिए.

3. पत्नी की माता

अधिकतर विवाहित पुरूष पत्नी की माता को उचित सम्मान नहीं देते लेकिन आचार्य चाणक्य इसे गलत मानते हैं, उनका कहना पत्नी की माता हर पति की माता होती है.


4. राजा की पत्नी

जिस राज्य में आप रह रहे हैं वहां के राजा की पत्नी को माता-सा सम्मान देना चाहिए. आचार्य चाणक्य के अनुसार राजा के लिए प्रजा संतान की तरह है इसलिए राजा की पत्नी भी माता समान है.


5. पालने-पोषण करने वाली महिला

माता के अतिरिक्त हर व्यक्ति के जीवन में ऐसी महिला होती है जो उसका पालन पोषण करती है. ऐसी स्त्री भी माता समान है… …Next


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