blogid : 19157 postid : 1306947

मंदिर निर्माण से भी पहले इस भगवान की होती थी पूजा, खुदाई में मिले प्रमाण

Posted On: 13 Jan, 2017 Religious में

Pratima Jaiswal

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पौराणिक कथाओं के आधार हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं को माना जाता है लेकिन इन देवी-देवताओं में से कुछ ही देवी-देवताओं के नाम हमें पता है, जिनकी पूजा की जाती है. भगवान विष्णु, श्रीराम श्रीकृष्ण, महादेव, महादुर्गा, संतोषी मां सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले देवी-देवता है लेकिन क्या कभी आपके मन में एक सवाल आया है कि सृष्टि के निर्माण के बाद सबसे पहले किसकी पूजा होनी शुरू हुई. चलिए, हम आपको बताते हैं हिन्दू धर्म में पूजे जाने वाले पहले देवता के बारे में.


cover


मंदिरों के निर्माण से भी पहले होती थी इनकी पूजा

सनातन धर्म के अनुसार मंदिरों का निर्माण करीब 2000 साल पहले शुरू हुआ था. इससे पहले गुफाओं में लोग एक बेलनाकार पत्थर रखकर उसपर पुष्प अर्पित करते थे. जिसे आज ‘शिवलिंग’ के नाम से जाना जाता है. लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये लोग बेलनाकार पत्थर को क्यों पूजते थे? इसका जवाब मिलता है शिवपुराण में.

shivling


‘शिवपुराण’ : शिवलिंग को सबसे पहले पूजने का रहस्य

माना जाता है कि आदिकाल में भगवान शिव ने हजारों सालों से तपस्या कर रहे साधु-संतों को दर्शन दिए थे. शिवपुराण के अनुसार शिव निंरकार है. शिव का कोई रूप नहीं है. आज हम शिव की जितनी तस्वीरें या मूर्तियों को देखते हैं वो केवल पुराणों के अनुसार भगवान शिव का पुरूष रूप है जिसे उन्होंने देवी सती और पार्वती से विवाह के लिए धारण किया था.

images

शिव ने इन साधुओं को दर्शन अपने प्रकाशरूप में दिया था यानि एक बेलनाकार दिव्यज्योति के रूप में प्रकट होकर. आसान भाषा में समझे तो एक बेलन के आकार में रोशनी जो हवा में तैर रही थी. इस रोशनी से इतना प्रकाश निकल रहा था, जिसे सहन कर पाना किसी साधारण मनुष्य की बस की बात नहीं थी. केवल सिद्ध साधु ही इस ज्योति को सहन कर सकते थे.


दर्शन करने के बाद पत्थर से बनाया बेलनाकार स्वरूप

भगवान शिव के दर्शन के बाद उनके जिस रूप को साधुओं ने देखा था. उस रूप में गुफा में पड़े पत्थर से शिवलिंग का निर्माण कर दिया गया क्योंकि उस समय सभ्यता, सुविधा और संरचना नहीं थी.

shivaling


सिंधु घाटी में शिवलिंग का रहस्य

माना जाता है कि सिंधु-घाटी सभ्यता 5000 साल पुरानी हैबलेकिन बीते साल खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर वैज्ञानिकों ने नई थ्योरी पेश की है, जिसके अनुसार ये सभ्यता 8000 साल से भी ज्यादा प्राचीन है. दक्षिण भारत के कई हिस्सों  से खुदाई में बेलनाकार पत्थर मिले है जो शिवलिंग के आकार के हैं। इसके अलावा भी उत्तराखण्ड, बंगाल, मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों की प्राचीन गुफाओं में शिवलिंग के अवशेष पाये गए हैं. वैज्ञानिकों ने जब इन पत्थरों की जांच की तो उन्होंने पाया ये शिवलिंग 8000 साल से भी ज्यादा पुराने हैं. कई पत्थरों पर आड़ी तिरछी रेखाएं खींची गई हैं. इसका प्रयोग उस समय के लोग पहर गिनने के लिए करते थे. इन अवशेषों के आधार पर साबित हो जाता है कि सबसे पहले शिवलिंग की पूजा होती थी. शिवलिंग यानी भगवान शिव…Next


Read More:

क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर दूध, समुद्र मंथन से जुड़ी इस रोचक कहानी में छुपा है रहस्य

गुजरात के इस मंदिर में है 5000 हजार साल पुराना शिवलिंग

एक ऐसा शिवलिंग जिसकी पूजा मनवांछित फल नहीं देती



Tags:                         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran