blogid : 19157 postid : 1296945

शास्त्रों में इन कारणों से एक ही गौत्र में विवाह की है मनाही, संतान पर पड़ता है असर

Posted On: 2 Dec, 2016 Religious में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

विवाह भारतीय समाज का एक अहम हिस्सा है. हिंदुओं में विवाह पद्धति के संबंध में कई प्राचीन परंपराएं मौजूद हैं. इनमें से एक है अपने गौत्र में शादी न करना. इसके अलावा मां, नानी और दादी का गौत्र भी टाला जाता है. ऐसा क्यों होता है इसका उल्लेख  पुराणों में किया गया है. अक्सर आपने सुना होगा लोग एक गौत्र में शादी नहीं करते शास्त्रों में भी ऐसे विवाह को गलत माना गया है.


Cover



कितने हैं गौत्र

आठ ऋषियों के नाम पर मूल आठ गौत्र ऋषि माने जाते हैं, जिनके वंश के पुरुषों के नाम पर अन्य गौत्र बनाए गए. अंगिरा, कश्यप, वशिष्ठ और भृगु, जबकि जैन ग्रंथों में भी 7 गौत्रों का उल्लेख है- कश्यप, गौतम, वत्स्य, कुत्स, कौशिक, मंडव्य और वशिष्ठ.


marry

अलग-अलग हैं नियम

विभिन्न समुदायों में गौत्र की संख्या अलग-अलग है. गौत्र को लेकर भी कई मान्यताएं हैं. कहीं 4 गौत्र टाले जाते हैं तो किसी वंश में 3 गौत्र टालने का भी नियम है. तीन गौत्र को छोड़कर ही विवाह किया जाता है एक स्वयं का गौत्र, दूसरा मांं का गौत्र और तीसरा दादी का गौत्र. कहीं कहीं नानी के गौत्र को भी माना जाता है और उस गौत्र में भी विवाह नहीं होता.


marrg1

मनुस्मृति में लिखा है

मनुस्मृति में लिखा है कि एक ही गौत्र में शादी नहीं करनी चाहिए अगर कोई ऐसा करता है तो उसका प्रभाव नकरात्मक होता है. साथ ही कई तरह की बीमारियां भी घर कर जाती हैं. एक ही गौत्र में विवाह करने से संतान में अनेक दोष पैदा होते हैं.


marrg0


ये भी है एक कारण

हिन्दू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह ना करने की एक और बड़ी वजह है एक ही गौत्र से होने के कारण लड़का और लड़की भाई-बहन होते हैं क्योंकि उनके पूर्वज एक ही वंश के होते हैं. ऐसे में एक ही गौत्र में विवाह वर्जित है.


marrg01


गौत्र में विवाह का विज्ञान

हमारी धार्मिक मान्यता के अनुसार एक ही गौत्र या एक ही कुल में विवाह करना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है. यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि एक ही गौत्र या कुल में विवाह होने पर दंपत्ति की संतान अनुवांशिक दोष के साथ उत्पन्न होती है. विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात् मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं…Next


Read More:

इस कारण से महिलाएं नहीं फोड़ती नारियल, ये है पौराणिक कहानी

मनुस्मृति: नुकसान से बचना है तो रखें इन पांच बातों का ध्यान

पति-पत्नी के वियोग का कारण बनता है इस मंदिर में माता का दर्शन



Tags:                         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran