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महाभारत में योद्धाओं की ये 6 शक्तियां आज आप करते हैं इस्तेमाल

Posted On: 23 Sep, 2016 Religious में

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आधुनिक युग में हर इंसान समय के साथ कदम मिलाकर चलना चाहता है. आज टेक्नोलॉजी ने हमें काफी आगे खड़ा कर दिया है. कभी-कभी हमारे दिमाग में पुराने युग से जुड़ी हुई बातें भी आती होगी, तब हम अक्सर सोचते हैं कि हम कितने एडवांस हो चुके हैं लेकिन जरा एक बार फिर से सोच लीजिए क्योंकि हम आपको महाभारत काल की ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था, यानि हजारों साल पहले हमारे पूर्वज हमसे ज्यादा एडवांस थे, जो महाभारत काम में विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते थे.
दूरदृष्टि से जानते थे महाभारत की घटना
आपने न्यूज चैनलों पर किसी खबर का आंखों देखा हाल तो जरूर देखा होगा. महाभारत में संजय ने सबसे पहले लाइव कवरेज धृतराष्ट्र को दी थी. कुरूक्षेत्र की रणभूमि पर जो भी हो रहा था, वो संजय को एक बड़े से पर्दे पर दिखाई दे रहा था. हालांकि, पौराणिक कहानियों में माना जाता है कि संजय आंखें बंद करके सबकुछ देखा करते थे लेकिन उस समय भी टेक्नोलॉजी इतनी एडंवास थी कि किसी दिव्य यंत्र पर युद्ध का पूरा घटनाक्रम दिखाई दे रहा था.
परमाणु बम का प्रयोग
महाभारत में जिसे हम ब्रह्मास्त्र के नाम से जानते हैं वास्तव में वो आज के जमाने का परमाणु बम था, जिससे भंयकर तबाही होती थी. अश्वत्थामा ने उतरा के गर्भस्थ शिशु को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था जिससे पृथ्वी पर बहुत तबाही हुई थी.
बेहतरीन शिल्पकारी
आज के युग में पत्थरों को तराशकर बेहतरीन नमूने बनाने के लिए प्रोफेशनल कोर्स किए जाते हैं लेकिन उस समय बिना किसी प्रोफेशनल कोर्स के बेहतरीन शिल्पकार मौजूद थे. महाभारत के युद्ध के बाद जब पांडव द्वारा कौरवों का विनाश कर दिया जाता है तो धृतराष्ट्र पुत्रमोह में आकर भीम को गले मिलने के बहाने अपने बाहुबल से दबाकर मारने की योजना बनाते हैं लेकिन श्रीकृष्ण पहले ही उनकी मंशा भांपकर भीम का एक असली लगने वाला पत्थर का पुतला बनवा लेते हैं. जब धृतराष्ट्र उस पुतले को भीम समझकर अपनी भाजुओं से दबाते है तो उन्हें बिल्कुल नहीं पता चल पाता कि वो भीम नहीं बल्कि एक पुतला है.
3डी महल और भवन
महाभारत में एक घटना है कि द्रौपदी का महल शीशे का बना होता है. जो बिल्कुल 3डी की आकृति का लगता था. जब दुर्योधन द्रौपदी के महल में प्रवेश करता है तो वो भ्रमित होकर फिसल जाते हैं. इससे पता चलता है कि महाभारत काल में भी आज जितनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता था.
आईवीएफ विधि
महाभारत में वर्णित है कि कुंती को ये वरदान मिला था कि वो किसी भी देवता से मंत्रोंच्चारण करके संतान की प्राप्ति कर सकती थी, लेकिन अगर तथ्यों पर ध्यान दिया जाए, तो पता चलता है कि पांडु पिता नहीं बन सकते थे इसलिए कुंती ने सभी देवताओं की मदद से पुत्रों को प्राप्त किया था. संभव है कि आईवीएफ विधि का इस्तेमाल सबसे पहले महाभारत में ही किया गया था लेकिन मर्यादा को बनाए रखने के लिए इस विधि को पूरी तरह से वर्णित नहीं किया गया.
टेस्ट-ट्यूब बेबी
गांधारी ने महाभारत में पुत्र प्राप्ति के लिए सबसे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल किया था. 101 घड़ों में अपने गर्भ से निकले मांस के टुकड़े के छोटे-छोटे टुकड़े करके 101 घड़ें में रख दिया था. जिसमें से 100 कौरव और उनकी एक बहन दुशाला का जन्म हुआ था.

आधुनिक युग में हर इंसान समय के साथ कदम मिलाकर चलना चाहता है. आज टेक्नोलॉजी ने हमें काफी आगे खड़ा कर दिया है. कभी-कभी हमारे दिमाग में पुराने युग से जुड़ी हुई बातें भी आती होगी, तब हम अक्सर सोचते हैं कि हम कितने एडवांस हो चुके हैं लेकिन जरा एक बार फिर से सोच लीजिए क्योंकि हम आपको महाभारत काल की ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था, यानि हजारों साल पहले हमारे पूर्वज हमसे ज्यादा एडवांस थे, जो महाभारत काम में विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते थे.

mahabhart


1. दूरदृष्टि से जानते थे महाभारत की घटना

आपने न्यूज चैनलों पर किसी खबर का आंखों देखा हाल तो जरूर देखा होगा. महाभारत में संजय ने सबसे पहले लाइव कवरेज धृतराष्ट्र को दी थी. कुरूक्षेत्र की रणभूमि पर जो भी हो रहा था, वो संजय को एक बड़े से पर्दे पर दिखाई दे रहा था. हालांकि, पौराणिक कहानियों में माना जाता है कि संजय आंखें बंद करके सबकुछ देखा करते थे लेकिन उस समय भी टेक्नोलॉजी इतनी एडंवास थी कि किसी दिव्य यंत्र पर युद्ध का पूरा घटनाक्रम दिखाई दे रहा था.


sanjay and dhritarashtra


2. परमाणु बम का प्रयोग

महाभारत में जिसे हम ब्रह्मास्त्र के नाम से जानते हैं वास्तव में वो आज के जमाने का परमाणु बम था, जिससे भंयकर तबाही होती थी. अश्वत्थामा ने उतरा के गर्भस्थ शिशु को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था जिससे पृथ्वी पर बहुत तबाही हुई थी.


bramhastra


3. बेहतरीन शिल्पकारी

आज के युग में पत्थरों को तराशकर बेहतरीन नमूने बनाने के लिए प्रोफेशनल कोर्स किए जाते हैं लेकिन उस समय बिना किसी प्रोफेशनल कोर्स के बेहतरीन शिल्पकार मौजूद थे. महाभारत के युद्ध के बाद जब पांडव द्वारा कौरवों का विनाश कर दिया जाता है तो धृतराष्ट्र पुत्रमोह में आकर भीम को गले मिलने के बहाने अपने बाहुबल से दबाकर मारने की योजना बनाते हैं लेकिन श्रीकृष्ण पहले ही उनकी मंशा भांपकर भीम का एक असली लगने वाला पत्थर का पुतला बनवा लेते हैं. जब धृतराष्ट्र उस पुतले को भीम समझकर अपनी भाजुओं से दबाते है तो उन्हें बिल्कुल नहीं पता चल पाता कि वो भीम नहीं बल्कि एक पुतला है.


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4. 3डी महल और भवन

महाभारत में एक घटना है कि द्रौपदी का महल शीशे का बना होता है. जो बिल्कुल 3डी की आकृति का लगता था. जब दुर्योधन द्रौपदी के महल में प्रवेश करता है तो वो भ्रमित होकर फिसल जाते हैं. इससे पता चलता है कि महाभारत काल में भी आज जितनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता था.


Hatinapur-


5. आईवीएफ विधि

महाभारत में वर्णित है कि कुंती को ये वरदान मिला था कि वो किसी भी देवता से मंत्रोंच्चारण करके संतान की प्राप्ति कर सकती थी, लेकिन अगर तथ्यों पर ध्यान दिया जाए, तो पता चलता है कि पांडु पिता नहीं बन सकते थे इसलिए कुंती ने सभी देवताओं की मदद से पुत्रों को प्राप्त किया था. संभव है कि आईवीएफ विधि का इस्तेमाल सबसे पहले महाभारत में ही किया गया था लेकिन मर्यादा को बनाए रखने के लिए इस विधि को पूरी तरह से वर्णित नहीं किया गया.

gandhari


6. टेस्ट-ट्यूब बेबी

गांधारी ने महाभारत में पुत्र प्राप्ति के लिए सबसे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल किया था. 101 घड़ों में अपने गर्भ से निकले मांस के टुकड़े के छोटे-छोटे टुकड़े करके 101 घड़ें में रख दिया था. जिसमें से 100 कौरव और उनकी एक बहन दुशाला का जन्म हुआ था…Next



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