blogid : 19157 postid : 1150180

गरुड़पुराण के अनुसार आत्महत्या के बाद आत्मा को मिलती है ये सजा

Posted On: 5 Apr, 2016 Religious में

Pratima Jaiswal

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हाल ही में प्रत्युषा बैनर्जी की आत्महत्या के पीछे विवाद गहराया हुआ है. इस घटना ने एक बार फिर समाज की सच्चाई सबके सामने ला दी है. जहां पर भीड़ में घिरे रहने वाला इंसान भी अकेला है. बहरहाल, भौतिक दुनिया से परे अगर आत्महत्या को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो गरुड़पुराण में आत्महत्या करने वाले इंसान के बारे में दिलचस्प उल्लेख मिलता है. दुनिया के अधिकतर धर्मों में कहा गया है कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की आत्मा पर शैतान अधिकार कर लेता है तथा उसे नर्क की आग में हजारों साल तक जलाता है. लेकिन हिंदू धर्म में इन धर्मों से अलग कई बातें कही गई हैं.



garundapuran punishment for suicide

दरअसल, पुराणों के अनुसार जन्म और मृत्यु प्रकृति द्वारा पूर्वजन्म के आधार पर निर्धारित कर दी जाती है. जैसे किसी मनुष्य की आयु 50 साल निर्धारित की गई है लेकिन अगर वो जीवन से हताश होकर 30 वर्ष की आयु में ही आत्महत्या कर लेता है तो बाकी के 20 साल उसकी आत्मा मुक्ति के लिए भटकती रहती है. ऐसे में अगर उसकी कोई इच्छा अधूरी छूट गई है तो वो उसे पूरा करने के लिए उसकी आत्मा विभिन्न योनियों में भटकती रहती है.



garundapuran punishment for suicide 2


Read : गरुड़ पुराण में वर्णित इन पांच कामों से आपकी उम्र हो सकती है कम

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आत्महत्या करने वाले मनुष्य को कभी मुक्ति नहीं मिल सकती. बल्कि गरुड़पुराण में कुछ उपाय बताए गए हैं जिससे आत्महत्या करने वाले मनुष्य की अशांत आत्मा को तृप्त किया जा सकता है. जो लोग अधूरी इच्छाओं के चलते आत्महत्या या किसी अन्य कारण से हुई मृत्यु के पश्चात मुक्त नहीं हो पाते, वो किसी नीच योनि में बंध जाते हैं. उनकी मुक्ति के लिए शास्त्रों में अनेकों उपाय बताए गए हैं. इन्हीं में कुछ उपाय इस प्रकार हैं.


hawan


मृत आत्मा हेतु तर्पण करना- इसमें किसी विद्वान पंडित को बुलाकर मृत आत्मा की शांति तथा मोक्ष के लिए तर्पण व पिंडदान किया जाता है. इससे मृतक की आत्मा को आगे की यात्रा हेतु बल तथा शांति प्राप्त होती है.

मृतात्मा की शांति हेतु सदकर्म करना- इसमें मृतात्मा की शांति हेतु सदकर्म यथा रामायण का पाठ, गीता पाठ या भागवत पाठ आदि कराए जाते हैं. इनसे भी मृत व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति प्राप्त होती है.

Read : गरुड़ पुराण: इनके घर भूलकर भी नहीं करना चाहिए भोजन

मृतात्मा की अधूरी इच्छा को पूर्ण करना- मोक्ष उन्हीं लोगों को नहीं हो पाता जिनके मन की कोई न कोई इच्छा अधूरी रह जाती है. ऐसी स्थिति में मृत व्यक्ति की अधूरी इच्छा जैसे बच्चों की पढ़ाई लिखाई, बढ़िया रहन-सहन आदि को पूरा करने का प्रयास करने से भी वह आत्मा मुक्त होकर अपनी आगे की यात्रा पर निकल जाती है.


garundapuran punishment for suicide 1

आत्महत्या करने वाले ऐसे लोग बनते हैं भूत-प्रेत

यदि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अत्यन्त विवश होकर आत्महत्या कर रहा है तथा उसकी कोई इच्छा अधूरी रह गई है तो उसकी आत्मा मुक्त नहीं हो पाती. ऐसी स्थिति में उसकी आत्मा किसी नीच योनि, भूत, प्रेत, पिशाच जैसी किसी योनि में प्रवेश कर जाती है तथा अपनी उम्र पूरी होने तक इन्हीं योनियों में बंध कर लोगों को पीड़ित करती रहती है. अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने के लिए कई बार उनकी आत्मा किसी दूसरे मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाती हैं. तथा उनके माध्यम से अपनी इच्छापूर्ति करती हैं…Next

Read more

भागवतपुराण में वर्णित ये 10 भविष्यवाणियां बताती है कि कलियुग अपने चरम पर कब होगा

गरुण पुराण के अनुसार इन पांच कामों को करने से मिलेगा हमेशा अपमान

दुर्योधन की इस भूल के कारण ही बदल गया भारत का इतिहास



Tags:                           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran