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इस भय से श्रीराम के प्राण नहीं ले सकते थे यमराज इसलिए वैकुंठ गमन के लिए अपनाया ये मार्ग

Posted On: 5 Feb, 2016 Religious में

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जिस समय मनुष्य का जन्म धरती पर होता है उसी समय उसकी मृत्यु का दिन भी प्रकृति द्वारा निश्चित कर दिया जाता है. मनुष्य हो या कोई अन्य जीव, सभी की मृत्यु निश्चित है. एक न एक दिन सभी को अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक में लौटना पड़ता है. जन्म-मृत्यु के इस चक्र से मनुष्य रूप में जन्में भगवान भी नहीं बच सके. उन पर भी प्रकृति का ये नियम सामान्य रूप से लागू हुआ. इसी तरह रामायण में भगवान श्रीराम के वैकुंठ गमन की कहानी मिलती है जिसमें यमराज को भी श्रीराम के प्राण लेने से भय लगता था. रामायण की कहानी के अनुसार भगवान श्रीराम की मृत्यु में सबसे बड़ी बाधा उनके प्रिय भक्त हनुमान थे. क्योंकि हनुमान के होते हुए यम की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो राम के पास पहुंच चुके. यमराज को भी अयोध्या आने से भय लगता था इसलिए श्रीराम ने इसका हल निकाला.

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एक दिन, राम जान गए कि उनकी मृत्यु का समय हो गया था. वह जानते थे कि जो जन्म लेता है उसे मरना पड़ता है. ‘यम को मुझ तक आने दो. मेरे लिए वैकुंठ, मेरे धाम जाने का समय आ गया है’, यम के प्रवेश के लिए हनुमान को हटाना जरूरी था. इसलिए राम ने अपनी अंगूठी को महल के फर्श के एक छेद में से गिरा दिया और हनुमान से इसे खोजकर लाने के लिए कहा. हनुमान ने स्वयं का स्वरुप छोटा करते हुए भंवरे जैसा आकार बना लिया और केवल उस अंगूठी को ढूढंने के लिए छेद में प्रवेश कर गए, वह छेद केवल छेद नहीं था बल्कि एक सुरंग का रास्ता था जो सांपों के नगर नाग लोक तक जाता था. हनुमान नागों के राजा वासुकी से मिले और अपने आने का कारण बताया. वासुकी हनुमान को नाग लोक के मध्य में ले गए जहां अंगूठियों का पहाड़ जैसा ढेर लगा हुआ था! ‘यहां आपको राम की अंगूठी अवश्य ही मिल जाएगी’. वासुकी ने कहा.


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हनुमान सोच में पड़ गए कि वो कैसे उसे ढूंढ पाएंगे क्योंकि ये तो भूसे में सुई ढूंढने जैसा था. लेकिन सौभाग्य से, जो पहली अंगूठी उन्होंने उठाई वो राम की अंगूठी थी. आश्चर्यजनक रुप से, दूसरी भी अंगूठी जो उन्होंने उठाई वो भी राम की ही अंगूठी थी. वास्तव में वो सारी अंगूठी जो उस ढेर में थीं, सब एक ही जैसी थी. ‘इसका क्या मतलब है?’ वह सोच में पड़ गए. वासुकी मुस्कुराए और बाले, ‘जिस संसार में हम रहते हैं, वो सृष्टि व विनाश के चक्र से गुजरती है. इस संसार के प्रत्येक सृष्टि चक्र को एक कल्प कहा जाता है’ वासुकी की इन बातों से हनुमान जान गए कि उनका नाग लोक में प्रवेश और अंगूठियों के पर्वत से साक्षात, कोई आकस्मिक घटना नहीं थी. दूसरी तरफ अयोध्या में हनुमान के न होने पर यमराज भयमुक्त होकर श्रीराम की आत्मा को वैकुंठ ले गए…Next


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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoj kumar के द्वारा
February 5, 2016

farji mangarnt kahani nahi banana chahiye sirji.


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